Swami Purnachaitanya exclusive interview.

A Dutch Indian yogi,a senior faculty of Art of Living and an author of a meditation book Looking Inward- Meditating to survive in a Changing World – Swami Purnachaitanya exclusive video interview links and detailed description below :

Part I

Part II

Part III

Book/Author Pitch:LOOKING INWARD: Meditating to Survive in A Changing World

With a world in the throes of a mental health crisis, with record number of people reporting depression, anxiety and chronic stress across the world, more people are looking for answers within. For a journey as abstract as towards one’s inner self, one needs a reliable guide, one who has made the journey. Today there are about 500 million people who meditate daily. But the question is, how effective is the practice and can it be done better, to give better outcomes? To answer this question and every other possible question about meditation on one’s mind, peppered with insightful anecdotes and wisdom, comes the book-Looking Inward: Meditating to Survive in A Changing World by Swami Purnachaitanya, a Dutch-Indian yogi and a very senior Art of Living faculty, who has been teaching the art of meditation to millions of people across the world for the last 15 years.

Written in a style that is simple yet riveting, the book takes the reader deeper into the source of what causes anxiety, stress and the solutions which lie within, step-by-step, giving one a clearer understanding of the mind and its nature. Set in the backdrop of the author’s journey in finding inner peace through powerful meditation practices, every chapter includes interesting anecdotes, precious insights, and a ten-minute exercise that will take you one step closer to mastering your mind and building your own meditation practice.

About the author

Swami Purnachaitanya is an author, speaker, and spiritual guide to many around the world. He is a sought-after teacher of yoga, meditation and mantras, and an enthralling storyteller with a warm and soulful presence. Swamiji was born in the Netherlands to a Dutch father and an Indian mother, who played a central role in kindling in him a keen interest in the spiritual practices, cultures and philosophies of the East. The defining moment in his life came at the age of sixteen, when he met Gurudev Sri Sri Ravi Shankar, the founder of the Art of Living, in whom he recognized his spiritual Master.

After completing his university studies in Indology with a specialization in Sanskrit, he left the Netherlands and moved to The Art of Living International Centre in Bengaluru, India to master the Vedic knowledge, rituals and recitation of mantras and Vedic hymns. He received his title (swami, monk) as an acknowledgement of his high state of consciousness and commitment to dedicating his life to serving others. Purnachaitanya is the name given to him by his Master, meaning he whose consciousness (chaitanya) has fully blossomed (purna).

What people have said about the book

‘Your emotional health has a direct impact on your physical health. Looking Inward allows you to identify the root cause of your stress, anxiety and other negative emotions and this book will enable you to address them with the help of meditation. Its beauty lies in its simplicity and clarity of thought. A must read for anyone looking to build meditation as a practice.’ – Luke Coutinho, author and wellness guru

‘In Looking Inward, Swami Purnachaitanya brings to the reader a beautiful handbook on meditation that one can safely practice and learn in their home. Given the state of the world we are in, everyone must read this book full of ancient wisdom presented in an easy-to-follow format.’ – Yash Birla, Indian industrialist.

‘When the world around us is in turmoil, we need to look inward. Meditation is the tool that can give us the much-needed solace and inner strength.’ – Gurudev Sri Sri Ravi Shankar

Do let us know if you have any questions, or would like to interact with Swami Purnachaitanya pertaining to the book, spirituality and his life journey? We would be happy to set up an interaction with him.

पुस्तक / लेखक पिच: लुकिंग इनवर्ड (भीतर देखना) : परिवर्तनशील जगत में स्थिरता के लिए ध्यान

आज सारी दुनिया मानसिक स्वास्थ्य के संकट की चपेट में है, विश्व में अवसाद, चिंता और गहन तनाव से ग्रस्त लोगों की संख्या बढ़ रही है, ऐसे में अधिक से अधिक लोग अपने सवालों का जवाब भीतर तलाश रहे हैं। एक ऐसी यात्रा पर जाने के लिए जो आत्मा की तरह अमूर्त है, एक विश्वसनीय मार्गदर्शक की आवश्यकता होती है, ऐसा मार्गदर्शक जिसने स्वयं यह यात्रा की हो। आज लगभग 500 मिलियन लोग प्रतिदिन ध्यान करते हैं, किन्तु प्रश्न यह है कि बेहतर परिणाम देने के लिए ध्यान का अभ्यास कितना प्रभावी है और क्या इसे बेहतर तरीके से किया जा सकता है? इस प्रश्न का उत्तर देने के लिए और ध्यान के बारे में किसी के मन में उठने वाले हर दूसरे संभावित प्रश्न का उत्तर देने के लिए एक डच-भारतीय योगी और वरिष्ठ आर्ट ऑफ़ लिविंग शिक्षक स्वामी पूर्ण चैतन्य द्वारा लिखी अंतर्दृष्टिपूर्ण उपाख्यानों और ज्ञान से पूर्ण पुस्तक-”लुकिंग इनवर्ड: मेडिटिंग टू सर्वाइव इन ए चेंजिंग वर्ल्ड” प्रकाशित हुई है, जो पिछले – वर्षों से दुनिया भर में लाखों लोगों को ध्यान की कला सिखा रहे हैं।

पुस्तक एक ऐसी शैली में लिखी गई है जो सरल किन्तु आकर्षक है, यह पाठक को चिंता और तनाव के कारणों व भीतर निहित समाधान तक गहराई से ले जाती है, जिससे पाठक को मन और मन के स्वभाव की स्पष्ट समझ प्राप्त हो जाती है। शक्तिशाली ध्यान अभ्यासों के माध्यम से आंतरिक शांति पाने में लेखक की यात्रा की पृष्ठभूमि में लिखी गयी इस पुस्तक के प्रत्येक अध्याय में रोचक उपाख्यान, बहुमूल्य अंतर्दृष्टि, और दस मिनट का अभ्यास शामिल है जो आपको अपने मन पर नियंत्रण करने और अपने स्वयं के ध्यान अभ्यास के निर्माण में एक कदम और आगे ले जाएगा।

लेखक के बारे में

स्वामी पूर्णचैतन्य विश्व में अनेक लोगों के लिए एक लेखक, वक्ता और आध्यात्मिक मार्गदर्शक हैं। वह योग, ध्यान और मंत्रों के एक लोकप्रिय शिक्षक और अपनी गर्मजोशी व भावपूर्ण उपस्थिति के कारण एक प्रभावशाली कथावाचक हैं। स्वामीजी का जन्म नीदरलैंड में एक डच पिता और एक भारतीय मां के घर हुआ था, जिन्होंने उन्हें पूर्व की आध्यात्मिक प्रथाओं, संस्कृति और दर्शन में गहरी रुचि जगाने में केंद्रीय भूमिका निभाई । उनके जीवन में निर्णायक क्षण सोलह वर्ष की आयु में आया, जब वे आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक गुरुदेव श्री श्री रविशंकर से मिले, जिनमें उन्होंने अपने आध्यात्मिक गुरु को पहचाना।

संस्कृत में विशेषज्ञता के साथ इंडोलॉजी में अपनी विश्वविद्यालय की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने नीदरलैंड छोड़ दिया और वैदिक ज्ञान, अनुष्ठानों, मंत्रों और वैदिक स्तोत्रों के पाठ में महारत हासिल करने के लिए आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर बेंगलुरु, भारत चले आये। उन्होंने अपनी उच्चचेतना व दूसरों की सेवा में अपना जीवन समर्पित करने की प्रतिबद्धता के रूप में स्वामी की उपाधि प्राप्त की। पूर्ण चैतन्य उनके गुरु द्वारा दिया गया नाम है, जिसका अर्थ है जिसकी चेतना पूरी तरह से खिल गई है।

पुस्तक के बारे में लोगों की राय

‘आपके भावनात्मक स्वास्थ्य का आपके शारीरिक स्वास्थ्य पर सीधा प्रभाव पड़ता है। भीतर की ओर देखने से आप तनाव, चिंता और अन्य नकारात्मक भावनाओं के मूल कारण की पहचान करने में सक्षम होते हैं और यह पुस्तक आपको ध्यान की मदद से उन्हें दूर करने की क्षमता प्रदान करेगी. इसकी सुंदरता इसकी सादगी और विचारों की स्पष्टता में निहित है। ध्यान को एक अभ्यास के रूप में बनाने के इच्छुक किसी भी व्यक्ति को इसे अवश्य पढ़ना चाहिए ।’ – ल्यूक कॉटिन्हो, लेखक और वेलनेस गुरु

‘लुकिंग इन्वर्ड’ के रूप में स्वामी पूर्ण चैतन्य ध्यान पर एक सुंदर पुस्तिका पाठक के लिए लाये हैं जिससे कोई भी अपने घर में सुरक्षित रूप से ध्यान का अभ्यास करना सीख सकता है। हम जिस दुनिया में हैं, उसे देखते हुए हर किसी को सरलता से पालन करने वाले प्रारूप में प्राचीन ज्ञान से भरी इस पुस्तक को पढ़ना चाहिए।’ – यश बिड़ला, भारतीय उद्योगपति।

‘जब हमारे आस-पास की दुनिया में उथल-पुथल है, तो हमें अपने भीतर देखने की जरूरत है। ध्यान वह साधन है जो हमें अत्यंत आवश्यक सांत्वना और आंतरिक शक्ति प्रदान कर सकता है।’ – गुरुदेव श्री श्री रविशंकर

क्या आपके कोई प्रश्न हैं, या आप पुस्तक, आध्यात्मिकता और उनकी जीवन यात्रा से संबंधित किसी विषय पर स्वामी पूर्णचैतन्य के साथ बातचीत करना चाहते हैं, तो हमें बताएं. हमें उनके साथ बातचीत कराने में प्रसन्नता होगी।

Author: sarkarimirror